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मस्ती की पाठशाला
अजब हमने देखे जहाँ में नजारे प्यासे खड़े थे नदी के किनारे
सोमवार, 20 अप्रैल 2009
जो आंसू फैल कर दरिया हुआ है हमारी आंख से टपका हुआ है ।
नही था बर्क मेरा नाम जिस पर वो दाना दांत मैं अटका हुआ है ।
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मेरे बारे में
Nirmal Vaid
Delhi, India
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